अकेले रहने का फैसला
जो अकेले-अकेले रहने पर तुले हैं,
उन्होंने सबके साथ भी तो रहकर देखा होगा,
रिश्तों को निभाकर, खुद को समझाकर,
हर दर्द को चुपचाप सहकर देखा होगा।
अकेलापन यूँ ही कोई नहीं चुनता,
इसके पीछे कोई गहरी कहानी होती है,
भीड़ में रहकर भी जो तन्हा कर दे,
उससे दूरी ही फिर आसान लगती है।
हर कोई रिश्तों से भागता नहीं,
कुछ लोग रिश्तों में बहुत थक जाते हैं,
जब साथ होकर भी साथ नहीं मिलता,
तो लोग अकेले रहना सीख जाते हैं।
— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X