सच कहूँ मेरी रगों में अब तो शामिल आप हैं
मैं नहीं हूँ आपके पर मेरे क़ाबिल आप हैं।
ले चलो तूफ़ाँ में कश्ति चाहे बिन पतवार के
आप ही हैं नाख़ुदा और मेरे साहिल आप हैं।
आप अल्लाह की निगेहबानी में बस महफ़ूज़ हैं
हर दुआ में और ईबादत में तो दाख़िल आप हैं।
आप क्या देंगे सज़ा मुलज़िम को मेरे ख़ून की
आप ही मुन्सिफ़ हैं ख़ुद, मेरे क़ातिल आप हैं।
हमने सोचा था हमीं हैं बेख़बर हर ग़म से यार
हमसे भी बड़कर सनम देखो तो गाफ़िल आप हैं।
हमसे गर जो हो गईं उन ग़लतियों को बख़्श दो
हम कहाँ लायक़ हैं उतने जितने फ़ाज़िल आप हैं।
अब नहीं हसरत ज़रा भी चाँद तारों की सनम
दीप अब तो ज़िन्दगी में हमको हासिल आप हैं।
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