हारकर भी मुस्कुराने का हुनर रखते हैं,
हम अँधेरों में भी जलने का जिगर रखते हैं।
ठोकरें लाख रोकें, कदम रुकते नहीं,
हम गिरकर भी उठें—ऐसा सफ़र रखते हैं।
- राजन सोनी
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