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चलते चलो

                
                                                         
                            *चलते चलो*
                                                                 
                            

रात की गोद से निकला गगन में लाल गोला,
लेकर आया संग अपने किरणों का झोला।

उठो जागो छोड़ो बिस्तर सारे जग से रवि बोला,
दिन है मेहनत करने को उतारो आलस का चोला।

पेड़ पौधे जंतु पशु पंछी मानव सब जग गए,
किरणों का जब उसने अपना झोला खोला।

नभ धरा जल जंगल सब स्फूर्ति से भर गए,
सबने प्रेम से सबको मधुर अभिवादन बोला।

पत्तों पर पानी ने बनाया सुंदर मोती का गोला,
हवा के झोंके ने फिर उस मोती का राज खोला।

नभ में उड़ चला स्वच्छंद पंछियों का टोला,
मेहनत कर दाना खाएंगे सारे जग से बोला।

हर सुबह जब अम्बर में आता है सूरज गोला,
सतत् अपने पथ पर चलते चलो सबसे बोला।

 
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4 घंटे पहले

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