मेरी घबराहट,
ऐ कागज़ ले ले तू?
ना
करूं गुनाह...
ना ग़म का कर्ज़ सर पे हो
हुस्न को मुबारक
ख़ूबसूरती उसकी
हम को मुबारक
ये लिखाई... सधी
एक-सी बीती... सदी...
'थोड़ा प्रयास'
तो ये बेख़ुदी करने से भी नहीं रोक सकती!
छोड़ूं प्यास...?
लो फिर हस्ती उन्हीं खयालों से घुटने लगी :(
मैं करिश्मा...
देखना चाहता हूं...
या मुझे,
अंजाम का नहीं मालूम...
मुझसे, संघर्ष करवा लो!
एक 'हर्ष की ढाल' लाके रख दो...
दो गत्ते, माथे के आजू-बाजू लगाने को...
राहुल
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