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के बाद भी ना वो मौन होए

                
                                                         
                            कैसी
                                                                 
                            
दिल्लगी की चाहत है...

सब कहते,
बुरी आफ़त है...

ख़ुद, जोड़े,
बाद में पछताते हैं...

यादों का बोझा...
लिए लिए... फिरते हैं

मुझे, कोई, काम ही नहीं आता :(

ख़ुदा कर दो...
रहम-ओ-करम अता 🙏

ज़िंदगी में की
ख़ता पे ख़ता...

हारते गए...
और खेलते रहे... जुआ पे जुआ... 

एक काम किया,
कि तन्हा रहना सीख लिया

पर, नहीं, नाम किया...
कि आराम बड़ों को दे पाता...

लिखना...
मन को तसल्ली देने...

फिसलना...
चंद्रमा को देखके...

तब...
हक़ीक़त में फिसलते थे...

अब,
कलम पर नहीं रोक रहे...

हरदम...
ज़ेहन में कोई शोर रहे...

रोकथाम...
के बाद भी ना वो मौन होए

-राहुल


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2 घंटे पहले

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