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तितलियाँ

                
                                                         
                            रंग-बिरंगी तितलियाँ ये जो गुलशन में मटकती हैं,
                                                                 
                            
न जाने कितने दिलों में,मोहब्बत के रंग भरती हैं,
किसी नवरक्तसंचित गुल के दिल पर बैठकर,
कुछ वक्त बिताकर फिर अपनी मस्ती में बहकती हैं,
फ़ज़ाओं में बिखरती हैं,कभी फि़जाओं में सिमटती हैं,
इन्हें मालूम होता है कि, किस ज़ानिब को जाना है,
मगर फिर भी ये बेफिकरी में यहाँ से वहाँ,
इधर-उधर,दर दर न जाने यूँ भटकती हैं,
कभी इनके मिजा़जों को महसूस करके देखो अयान,
ये गुलों से छीनकर, खुशबू,खुद कितना महकती हैं...


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6 वर्ष पहले

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