किसने कहा? पराई होती हैं बेटियाँ,
कुल-संस्कार का गौरव होती हैं बेटियाँ,
मस्तक का पावन ताज होती हैं बेटियाँ।
किसने कहा पराई...!
ऊंचे नभ में, उड़ान भरती हैं बेटियाँ,
आदर्श समाज की नींव गढ़ती हैं बेटियाँ,
गर्व से कहूँ, हमारा अभिमान हैं बेटियाँ।
किसने कहा पराई...!
कहते जिसे हैं सब 'पराई धरोहर',
अधूरी लगती जिसके बिना जीवन-डगर,
रोता है दिल, जब विदा होती हैं बेटियाँ।किसने कहा पराई...!
सुख-दुख में दौड़ी चली आती हैं बेटियाँ,
पिता की उम्मीद, माँ के प्राण हैं बेटियाँ,
सूना है वह आँगन, जहाँ नहीं हैं बेटियाँ।
किसने कहा पराई...!
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