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कुछ कुछ आप भी भूल जाइए

                
                                                         
                            कभी कभी कुछ बातों को मै भूल जाता हूं ,
                                                                 
                            
कुछ आप भी भूल जाइए
हमेशा हर कुछ याद रखना अच्छी बात नही है
कुछ कुछ आप भी भूल जाइए

हर कुछ का हमेशा मिलता नहीं हिसाब
कभी कभी पढ़ा कीजिए अपने दिल की भी किताब
खुद को जहाँ - तहाँ मत फंसाइए
कुछ कुछ आप भी भूल जाइए

कल हमको देख कर आप ने कर दिया था अनदेखा
आदमी अजीब जीव है, है आदमी अनोखा
छोड़िये कल की बात, आज हमसे हाथ मिलाइये
कुछ कुछ आप भी भूल जाइए

हर आदमी के दिल में बसता है एक चोर
यह चोर किसी को गुमराह करता है
इस पर चलता नहीं है किसी का जोर
हमेशा फायदे की बात अच्छी नहीं है
कभी कभी नुकसान भी उठाइये
कुछ कुछ आप भी भूल जाइए

अगर आप से मिले कभी कोई बच्चा गरीब का
वो हो सकता है आपके आसपास का
आप के करीब का
उस बच्चे से मिलकर खुद हंसिए उस बच्चे को भी हंसाइए
कुछ कुछ आप भी भूल जाइए

कुछ लोग किसी को कुछ देकर सदा के लिए भूल जाते है, पर जिन लोगों का बुरा वक्त में किसी का साथ मिला हो, वो उनको भूल पाते हैं
वक्त-बे वक्त आप भी किसी के काम आइये
कुछ कुछ आप भी भूल जाइए

चलो भूल जाते है ज्यादा को कम को
हर दर्द को भूल जाते हैं, भूल जाते है हर गम को
रोना तो बहुत है कभी तो मुस्कुराइये
कुछ कुछ आप भी भूल जाइए

वो जिनको बहुत याद रखने की बीमारी थी ,
वो हो गये सब पागल
जो चालाक थे, हालात के साथ खुद को लिया बदल
आप भी ये नुख्खा अपनाइये
कुछ कुछ आप भी भूल जाइए
-रविन्द्र अमन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

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