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किसी को सही राह दिखाता है

                
                                                         
                            उम्र बहुत छोटी है, बहुत बड़ा है जहान
                                                                 
                            
यह सोचकर मैं हूं बहुत हैरान
कैसे सबको लिखूंगा, मैं अपनी कविता में

लिखना है हकीकत को, लिखना है किसी के
सपनों को
बेगानों को लिखना है, लिखना हैअपनों को

बिन रुके मैं किए जा रहा हूं अपना काम
पल भर को मुझको नही है आराम

सोचता हूं फेक दूँ कागज, फेक दूँ कलम
मैं क्यों किसके के बारे में लिखूं ,आखिर कौन है हम

पर यह देखकर दिल डोल जाता है
जिस उम्र में किसी बच्चे को चाहिए प्यार और दूध
वो बच्चा अपनी आँखो से देखता है
बहता हुआ खून,देखता है युद्ध

जब देखता हूं भूख से तड़पती जवानी
तब कुछ लिखना पड़ता है, आंखों में भर जाता है पानी

जब देखता हूं किसीकी लाचारी मजबूरी
तब मेरा वहाँ कुछ कहना होता है जरूरी

मैं कवि हूं, इंसानियत मेरा मजहब है
मुझको मेरा मजहब यही सिखाता है
कवि किसी का दुख-दर्द कम करता है
किसी को सही राह दिखाता है
-रविन्द्र अमन
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4 घंटे पहले

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