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धीरे धीरे हमने छू लिया आसमान

                
                                                         
                            पहले थोड़ा मुश्किल लगता था,
                                                                 
                            
अब लगता है आसान
धीरे धीरे हमने छू लिया आसमान

सबसे पहले तो हमने अपने रब को याद किया
फिर खुद को थोड़ा बर्बाद किया,
खुद को थोड़ा आबाद किया
सारी चालाकी हमने छोड़ दी, थोड़ा हो गए नादान
धीरे धीरे हमने छू लिया आसमान

हम दीवाने है, चांद तारों को भी ढूंढ के लाना है
भगवान का दर दूर है, हमको वहां तक जाना है
देखना है किस गली, किस पर्वत रहता है भगवान
धीरे धीरे हमने छू लिया आसमान

करने से हर कुछ होगा, कुछ नही करना एक बहाना है
दीवानों को पता नही, कौन अपना है कौन बेगाना है
हम जो चाहेंगे वही करेंगे ,दिल में है यही अरमान
धीरे धीरे हमने छू लिया आसमान

राहों में जितनी ठोकर लगी, सबको अपनाते रहे
चाहे जैसे रहे हर हाल में गीत प्यार का गाते रहे
चाहे जितना गम मिला , हर गम से रहे अनजान
धीरे धीरे हमने छू लिया आसमान
-रविन्द्र अमन
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एक घंटा पहले

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