आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अहमदाबाद दुर्घटना

                
                                                         
                            न जाने कैसी हवा आज चली,
                                                                 
                            
जो पल भर में कितनी ज़िंदगियों को साथ ले गयी।
कुछ सपनों के लिए, कुछ अपने घर के लिए,
242 लोग निकले थे सपनों और अपनों से मिलने के लिए।
पर किसी को पता भी न चला क्या हुआ,
4 मिनिट में जीवन समाप्त हो गया।
विमान उड़ान भरते ही गिर गया,
धमाके से आकाश आग और धुएं से भर गया।
धरती भी कांप गयी, ये क्या हो गया,
कितने लोगों का जीवन समाप्त हो गया।
जिसने भी देखा, सुना ये मंजर,
काँप गया तक ह्रदय थर-थर।
देश रो रहा है ये त्रासदी देखकर,
उन अपनों का क्या हाल हो रहा होगा, अपनों को खोकर।
फायर बिग्रेड, एनडीआरएफ, मदद कर रहे हैं,
विमान के मलबे में दबे हुए लोगों को ढूंढ रहे हैं।
ये काल ने जो विकराल रूप लिया है,
आत्मा को रुला दिया है।
हे ईश्वर जो घायल हैं वे जल्दी स्वस्थ हो जाएँ,
जिन्होंने अपने प्राण खो दिए, ईश्वर उनकी आत्मा को शांति पहुँचाएँ।
जिन्होंने अपने, अपनों को खोया,
उनके ह्रदय को धीरज मिल जाए,
हे ईश्वर ऐसा हादसा फिर कभी न हो पाए।
-रिया दुबे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर