आज दिल मुझसे सवाल कर बैठा रस्म ए उल्फत पर अब मुझसे ही हिसाब कर बैठा
मैं भी बेचैन दिल में लाकर करार दर्द सारा दिल में महफूज़ कर तुमसे सवाल कर बैठा
चाहा था मैने दिल की किताब लिखना देख कर अंदाज तेरा मैं तुमसे ही करार कर बैठा
जिस रोज़ तेरे झूठ की सच्चाई खुली कल रात सो न सका तो मैं खुद से बगावत कर बैठा
गम ए उल्फत के कारवां में होकर शामिल ऐ चश्म ए करम मैं अब तुमसे हिसाब कर बैठा
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