ऐ दर्द मंदो मत पूछो आकर हम क्यूं लौट गए शौक ए गरज खातिर जिधर चाहा तुमने उधर ही हम बैठ गए
है गरज मेरा उनसे गुफ्तगू करना तकल्लुफ कैसा हम उनकी मर्जी के मुताबिक जिधर चाहा उधर हम बैठ गए
जिस नाज़ ओ नज़र से देखा है उन्होंने मुझको अब कोशिश ए गुफ्तगू खातिर सामने उनके ही हम बैठ गए
बढ़ा कर अपनी हसरतें गुनाह मैं कर सकता नहीं आजादी ए ख्याल की नहीं हमें जरूरत उनसे हम कह गए
मिले न जब दिल से तो गर्दिश ए हालात से दिल्लगी कर ली दिल मेरा तोड़ने वाले बात दिल की हम कह गए
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