कमी क्या है मुझमें जो देख कर मुंह मोड़ने लगे बुझा कर दिया आस का दिल में मेरे आप अब अंधेरा बढ़ाने लगे
कहना तो था बहुत आपसे फिर भी चुप रहना पड़ा हमें बढ़ा के बेचैनी दिल में होकर मायूस अश्क हम बहाने लगे
तुमने भी क्या सोच के अहसान फरामोश हमें समझ लिया चल के कांटों के राह पर चिराग ए दिल हम बुझाने लगे
अब तो बड़े सलीके से ऐतबार आप पर हमें करना पड़ेगा देकर दुआएं तुम्हें बार बार तह ए दिल से समझाने लगे
नक्श ए दिल पे जो बीती है कह ना पाया किसी और से बिछड़ कर तुमसे इस बार मुसीबतें अपनी ही बढ़ाने लगे
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