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अर्ज ए बेचैन ख्वाहिशें

                
                                                         
                            बढ़ा कर अरमां दिल में बार बार रोने से होगा कुछ नहीं सोच के अब अंजाम ए वफा दर्द दिल का हम बढ़ाए हैं
                                                                 
                            
दिया धोखा बिखरती तमन्नाओं ने हमें बार बार सोच कर इरादा तेरा होकर मायूस सामने सच कहने हम आए हैं
हाल ए बदनसीबी मत पूछो तुम मुझसे सुन के वादा ए उल्फत आपका खुदा कसम चिराग ए दिल हम जलाए हैं
सिखा दिया बर्बादियों ने भी हमें घुट घुट जीना आजमा के तुम्हें बार बार हुआ जो दर्द ए वफा वो हम आजमाए है
करना गुजारिश तुमसे कोई आसान नहीं खाकर ठोकरें बार बार राह ए तलब बेचैन तमन्नाओं को भी हम समझाए हैं

 
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एक घंटा पहले

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