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मैं शुक्रगुजार हूँ!

                
                                                         
                            मैं शुक्रगुजार हूँ, उन तमाम लोगों का
                                                                 
                            
जो जिन्दगी का सबसे ज्यादा मजाक उड़ाते हैं,
जो जुल्म और अत्याचार करते हैं,
जो भावनाओं में जीकर
इंसान होते हुए भी पाश्विकता का प्रमाण देते हैं,
जो दिन-रात मानवता का कत्ल करते हैं,
हर पवित्र और पूज्य वस्तु का तिरस्कार करते हैं,
जो सिर्फ बुराईयों का साथ देते हैं|
क्योंकि यही वो लोग हैं,
जो जीवन को दिशा देते हैं,
और अच्छे कार्यों का श्री गणेश कर्ता बनते हैं|
यही वो लोग हैं
जो महान लोगों के जन्म का कारण बनते हैं,
और सुव्यवस्था की तरफ ध्यान खींचते हैं|
यही वो लोग हैं
जो मानवता को परिभाषित करते हैं,
एवं जंगली साम्राज्य से इंसानी साम्राज्य की शुरुआत करते हैं|

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले

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