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शाश्वत प्रेम

                
                                                         
                            रेगिस्तान मे एक घूँट पानी की पिला दे कोई
                                                                 
                            
ठिठुरती ठंड मे कम्बल ओढ़ा दे कोई
असह्य पीड़ा मे मां से मिला कोई
तड़पते भुख मे रोटी खिला दे कोई
बेचैन रातों मे चैन की नींद सुला दे कोई
निःशब्द क्षणों मे वीणा बजा दे कोई
हृदय के तार झनझना दे कोई
क्या ऐसा है कोई
हाँ वह है
कौन
प्रेम
शाश्वत प्रेम

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6 वर्ष पहले

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