अगर लक्ष्य पर नजर टिकी है,
राह कोई फिर कठिन कहां है?
अगर ठान बैठे हो सच में ,फिर मुश्किल का नाम कहां है ?
राह कोई फिर कठिन कहाँ है?
सोचा होगा पथ पर चलकर ,फूल और छाया भी मिलेगी
लेकिन कदम बढ़ाए ही थे, राह धूप कांटों से भरी थी ।
तुम भी एक पल ठहरे होगे, अधिक सोच कर सहमें होंगे ।
लेकिन रुकने वालों को फिर, ऐश और आराम कहां है?
अगर लक्ष्य पर नजर टिकी है, राह कोई फिर कठिन कहां है?
जिनकी ख्वाहिश अधिक बड़ी है ,मेहनत भी कुछ ज्यादा होगी ।
लक्ष्य प्राप्ति के खातिर ,नींद चैन की बलि चढ़ेगी।
इतना करने पर पक्के में ,जीत मिलेगी यह भी तय कहां है?
अगर लक्ष्य पर नजर टिकी है ,राह कोई फिर कठिन कहां है?
एक होड़ जब शुरू हुई तो ,लगता दूजी भी हासिल हो
भूख प्यास भी दाँव लगाकर ,कब सोचा अपने बारे में
लेकिन भूले हम, अंतहीन इस दौड़ का देखो ,अरे बताओ अंत कहां है ?
अगर लक्ष्य पर नजर टिकी है राह कोई फिर कठिन कहां है।
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