आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

"मोहब्बत का श्रृंगार"

                
                                                         
                            अपने किरदार से ना शिकायत चाहता हूँ,
                                                                 
                            
तुमसे मिलने की एक इजाजत चाहता हूँ।

अगर कुछ देना है तो एक इच्छा पूरी करदो,
मेरे बदले में खुद को मेरी कर दो।

जो मेरी हुई तो मोहब्बत का श्रृंगार करूँगा,
मरते दम तक बस तुम्हें प्यार करूँगा।
-प्रखर कुमार सागर
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर