संज्ञा दी थी
महात्मा गांधी ने
खादी को
'स्वतंत्रता वर्दी' की
जैसा कि
पीटर गोंसाल्विस ने
लिखा था अपनी पुस्तक
'क्लोथिंग फॉर लिबरेशन'
में
खादी केवल एक परिधान
या वस्त्र न होकर
परिधान है
आज़ादी या मुक्ति का
खुरदरे खद्दर के रूप में
कभी बनी थी जो खादी
सादगी, समानता, स्वदेशी
और औपनिवेशिक सत्ता
के प्रतिरोध का प्रतीक
थी जो खादी
बदल गया है बेशक
आज रूप उसका
लेकिन खादी में निहित
गांधीवादी मुक्यों को क्या
भूल सकते हैं हम कभी?
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