एहसास अगर होता,
तो ख़ामोशी भी कुछ कहती,
बिन शब्दों के आँखें पढ़तीं,
और दिल की बातें दिल तक पहुँचतीं।
तुम पास होते या दूर,
फ़र्क शायद इतना न होता,
बस एक-दूसरे के दर्द का
थोड़ा-सा एहसास होता।
कुछ रिश्ते नाम के मोहताज नहीं होते,
कुछ जज़्बात शब्दों के मोहताज नहीं होते,
बस कोई समझने वाला चाहिए—
जो ख़ामोशी में भी
दिल की आवाज़ सुन सके।
काश, एहसास अगर होता,
तो zकुछ रिश्ते अधूरे न रहते,
कुछ बातें अनकही न होतीं,
और हम दोनों…
शायद आज भी साथ होते।
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