माँ, तुझमें ही दिखे मुझे सारा संसार,
तेरे बिना यह जीवन लगे बेकार।
माँ, तुझमें ही बसा है मेरा हर एक जहाँ,
तेरे बिना सूना लगे ये आसमाँ।
माँ, तुझ बिन मैं भी मैं नहीं,
तेरे बिना धुंधला है जीवन का यह दर्पण।
माँ, तुझ बिन फूलों में रंगत कहाँ,
हवा में भी कोई सरगम कहाँ।
तुझसे ही धूप सुनहरी लगती है,
तेरे बिना चाँदनी भी फीकी लगती है।
तेरे हाथों के पकवानों में जो स्वाद है,
वो दुनिया के हर व्यंजन से खास है।
माँ, तुझ बिन पंखों को उड़ान कहाँ,
कलियों को भी मुस्कान कहाँ।
माँ, तुझ बिन आँगन सूना-सूना है,
तेरे बिना हर सपना अधूरा है।
मिट्टी में भी खुशबू खो जाती है,
जब तेरी ममता दूर हो जाती है।
माँ, तू ही मेरी पहचान, तू ही मेरा मान,
तेरे बिना अधूरा हर अरमान।
तू है तो हर खुशी अपनी सी लगती है,
वरना ये दुनिया भी बेगानी सी लगती है।
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