आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तुझे खोने की मुझमें हिम्मत नहीं है

                
                                                         
                            तेरे दिल में अब वो मोहब्बत नहीं है
                                                                 
                            
मुझे तुझसे कोई शिकायत नहीं है

समझता रहा मैं तुझे यूँ ही अपना
तुझे मेरी शायद ज़रूरत नहीं है

ख़ताएँ बहुत सी हमी से हुई हैं
मगर दिल में कोई अदावत नहीं है

गुनहगार तेरा हूँ माना सनम मैं
भुलाने की भी तुझको नीयत नहीं है

मेरा दर्द ये ख़ूबसूरत है सबसे
बिना तेरे जीने की हसरत नहीं है

ये निस्बत भी जन्मों की 'पारुल' है अपनी
तुझे खोने की मुझमें हिम्मत नहीं है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर