आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जैसे नदिया बहती रहती है

                
                                                         
                            ये जीवन चलता रहता, जैसे नदिया बहती रहती है
                                                                 
                            
रवानी ही है जीवन, हमसे वो ये कहती रहती है

मिलेंगे राह में पत्थर बहुत, तुमको मुसीबत के
बिना परवाह है बढ़ना, वो जैसे बढ़ती रहती है

नहीं रुकती वो, सागर से मिलन से पहले जीवन में
तुम्हें मक़सद को, हासिल करने को, वो कहती रहती है

बुझा कर प्यास सबकी, सार्थक करती है वो जीवन
समर्पित ख़ुद को कर, सबके लिए ही खटती रहती है

हैं हम इक बूँद और परमात्मा, तो है महासागर
मिलन को रूह जीवन भर, सफ़र ही करती रहती है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर