ये जीवन चलता रहता, जैसे नदिया बहती रहती है
रवानी ही है जीवन, हमसे वो ये कहती रहती है
मिलेंगे राह में पत्थर बहुत, तुमको मुसीबत के
बिना परवाह है बढ़ना, वो जैसे बढ़ती रहती है
नहीं रुकती वो, सागर से मिलन से पहले जीवन में
तुम्हें मक़सद को, हासिल करने को, वो कहती रहती है
बुझा कर प्यास सबकी, सार्थक करती है वो जीवन
समर्पित ख़ुद को कर, सबके लिए ही खटती रहती है
हैं हम इक बूँद और परमात्मा, तो है महासागर
मिलन को रूह जीवन भर, सफ़र ही करती रहती है
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