अपने अधर को तुम मेरे अधर पर कुछ इस तरह धर दो,
कि फिर न रह जाएं कुछ बांकी कहने को अधर पर।
उन अधरों के मिलाप से हो जाए तुम पर कुछ ऐसा असर,
कि मेरे तरह भी न हो सके आपके जीवन का बसर ।
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