आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मेरे प्यारे बापू

                
                                                         
                            ऐसे थे मेरे प्यारे बापू
                                                                 
                            
थे जग में सबसे न्यारे बापू

पर पीड़ा समझते थे वो
दुखियों के संग रहते थे वो
सादगी की पहचान थे बापू
दीन दुखियों की जान थे बापू

सत्य की राह पर चलते थे वो
झूठ का कभी न दिए वो साथ
जुल्मों को सहते गए
हिंसा की वो किए न बात
सत्य और अहिंसा का,
सबको पाठ पढ़ाया बापू

ऐसे थे मेरे प्यारे बापू
थे जग में सबसे न्यारे बापू

जन-जीवन पर ध्यान दिए वो
अछूतों को सम्मान दिए वो
ऊँच-नीच का भेद मिटाकर
समरसता का ज्ञान दिए वो
सद्भाव दर्शाने वाले,
माँ भारती के संतान थे बापू

ऐसे थे मेरे प्यारे बापू
थे जग में सबसे न्यारे बापू
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर