बारिशों की बूँदों से खामोश बातों में
याद आती है मुझे वो तन्हा-रातों में
ज़ख्म,दर्द,आह,उफ्फ़ तो आ ही गये हैं अब
ये किसकी आहट है मेरे सन्नाटों में !
: - पप्पू मिश्र 'पुष्प'
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