आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कौन लिखता है?

                
                                                         
                            अधरों पर ताला,
                                                                 
                            
नयनों में ज्वाला।
चुप मैं था—
या था उजाला?

भीतर स्पन्दन,
बाहर निस्तब्ध।
जग ने कहा—
"यह मौन।"

कागज़ ने छुआ,
शब्द झर गए।
मैं अनकहा,
अर्थ भर गए।

लेखनी चली,
जड़ता पिघली।
मौन की कोख से,
दृष्टि निकली।

शब्द नहीं थे,
केवल संकेत।
रिक्त हुआ मैं,
शेष अनिर्वच।

अब प्रश्न यही—
कौन लिखता है?
मैं मौन में,
या मौन मुझमें?

.
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर