मंदिर की घंटी, मस्जिद की अज़ान,
गुरुद्वारे की वाणी, चर्च की प्रार्थना महान।
राहें अलग, विश्वास अलग,
फिर भी भारत की पहचान एक।
हिंदू हो या मुस्लिम भाई,
सिख हो या ईसाई।
बौद्ध, जैन और पारसी भी,
सबकी अपनी रीत निराली।
भाषाएँ अलग, वेश अलग,
फिर भी दिलों में प्यार एक।
रंग अनेक, रूप अनेक,
फिर भी भारत की शान एक।
कोई पूजा करे मंदिर में,
कोई सजदा करे दरबार।
अपनी-अपनी आस्था लेकर,
सबका भारत एक परिवार।
जाति-धर्म की दीवारें छोड़ो,
नफरत का हर बंधन तोड़ो।
अपनी पहचान रहे अपनी,
पर सम्मान रहे सबका एक।
क्योंकि भारत सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं,
यह करोड़ों दिलों का घर है।
यहाँ पूजा के तरीके अलग हो सकते हैं,
मगर हर धड़कन में भारत बसता है।
जब तक एक-दूसरे के त्योहार में खुशी बाँटेंगे,
जब तक एक-दूसरे के दुख में साथ खड़े होंगे,
तब तक कोई दीवार हमें बाँट नहीं पाएगी।
हम अलग-अलग दीपक सही,
पर रोशनी हमारी एक है।
हमारी पहचान अनेक सही,
पर सबसे ऊपर—
हम इंसान हैं,
और हमारा भारत एक है।
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