कुछ लोग हुए ऐसे भी जो लहरों से डर गये।
कभी समुंदर में ना उतरे, किनारों पे मर गये।
इक वो है जो तेरे लिए तिनका ना तोड़ सके,
एक हम थे जो तेरे वास्ते, हजारों से लड़ गए।
मैने सोचा था अब ना सोचूंगा कभी तुझे,
हुई शाम फिर तेरी याद में, पहरों पहर गए।
-दर्पण
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