कैसे गीत लिखूं प्यार के ?
कभी सपने नहीं देखे इजहार के।
देखता हूं जब रंग ढंग आज के,
पता नहीं... कब आएंगे दिन बहार के ?
-चंद्र दत्त शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X