जीते जी क्या कद्र है ?
ऐसा कौन सा भद्र है ?
जिसने न की गुस्ताखी,
फिर भी उसे तो सब्र है।
-चंद्र दत्त शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X