जीवन ये तेरा सूखा सूखा पतझड़,
मैं बसंत के प्यारे प्यारे रंग भर दूं।
अब तक जो था सूना सूना जीवन,
मैं राहों में फूलों की लड़ियां बिछा दूं।
दूर हो जाएगा ये तेरा अकेला पन,
आ...मैं खुशियों का संसार बसा दूं।
खिला खिला रहेगा तेरा ये जीवन,
हंसते हंसते अपना जीवन लुटा दूं।
मिसाल बनेगी तेरी मेरी ये जोड़ी,
आ तुझे... मैं वरमाला पहना दूं।
-चंद्र दत्त शर्मा
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