जैसा कर्म में लिखाकर लाते हैं,
वैसा ही तो फल मिलता है।
माता पिता का साथ होना,
किसी अमृत से कम नहीं है।
बात सही है कि...,
माता पिता जैसा कोई नहीं होता,
किसी कारण माता पिता नहीं होते,
तो सब कार्य स्वयं नहीं हो सकते,
यह गलत फहमी है,
सहारा तो लेना ही पड़ता है।
चंद्रमा चाहे अपने आप को,
कितना ही बड़ा समझे?
पर उसे भी चमकने के लिए,
सूर्य का सहारा लेना पड़ता है।
अहम के होते कोई किसी का,
मां बाप नहीं बन सकता,
जो खुद बड़े हों,
उनके आगे कौन बड़ा बन सकता है?
-चंद्र दत्त शर्मा
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