सर्दी में खिलती धूप जैसी,
गर्मी में नीम की छाँव हो तुम।
तुम हो जैसे वर्षा में हरियाली,
तुम्हारे बिन जीवन मेरा लगता है,
खाली-खाली...
भोर के उजियारे जैसी,
भानु की पहली किरण हो तुम।
तुम हो जैसे खिलते फूलों की डाली,
तुम्हारे बिन जीवन मेरा लगता है,
खाली-खाली...
बसंत की बहार जैसी,
फूलों की बौछार हो तुम।
तुम हो जैसे क्षितिज पर छाई,
सूर्य की लाली।
तुम्हारे बिन जीवन मेरा लगता है,
खाली-खाली...
अंबर में झिलमिलाते तारों जैसी,
पूर्णिमा की चाँदनी रात हो तुम।
तुम हो जैसे अँधेरे में,
जुगनू की उजियारी।
तुम्हारे बिन जीवन मेरा लगता है,
खाली-खाली...
नदियों की मधुर आवाज़ हो तुम,
बहते पानी-सी साफ़ हो तुम।
तुम्हारी ज़ुल्फ़ें सावन की,
घटाओं-सी काली-काली।
तुम्हारे बिन जीवन मेरा लगता है,
खाली-खाली...
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