अपनी सादगी की नज़ाकत को,
कभी मेरे नज़रिये से निहारकर देखो।
फ़ुर्सत मिले तुम्हें कभी तो,
आईने के सामने अपनी ज़ुल्फ़ें सँवारकर देखो।
ये फूल, तितलियाँ और बसंत-बहार,
सब फीके नज़र आएँगे।
ख़ूबसूरती का असली एहसास करना हो तो,
एक शाम मेरे साथ गुज़ारकर देखो।
मैं शराब का सहारा नहीं लेता,
तुम बस एक नज़र उठाकर तो देखो।
तुम्हारी आँखों में कितना ख़ुमार है,
कभी ख़ुद ही इसका असर आज़माकर तो देखो।
तुम दूर बैठकर जो जादू करते हो,
कभी थोड़ा क़रीब आकर तो देखो।
मेरे दिल में कितनी हलचल है,
एक बार मेरी ख़ामोशी को समझकर तो देखो।
तुम्हें भी अपना दीवाना बना लेंगे हम,
बस एक बार तुम भी हमसे
मोहब्बत करके तो देखो…
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