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यादों का बस्ता

                
                                                         
                            जुदा जो आज तुमने अपना रस्ता कर लिया
                                                                 
                            
वजह बस ये कि हमने ख़ुद को सस्ता कर लिया

मिलेगी अब न तुझको कोई भी मेरी ख़बर
त'अल्लुक़ तुझसे अब हमने शिकस्ता कर लिया

बचाकर क्या करेंगे इस जले दिल को भला
सो अपने हाथ से ही इसको ख़स्ता कर लिया

छिपाना था मुहब्बत का ये किस्सा शहर से
दफ़न दिल में कहीं यादों का बस्ता कर लिया

'अज़ल' इस राह पर तन्हा चला जाता नहीं
मिले जो लोग रस्ते में, सो दस्ता कर लिया
--निशान्त शुक्ल 'अज़ल'
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एक घंटा पहले

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