कविता : विपत...
इंसान को गर्मी हो तो
लू लगने का डर
ठंड हो तो इंसान कांपे
फिर थर थर
बारिश आए तो इंसान
को भीगने का डर
आंधी तूफान आए तो झोपड़
पट्टी उखड़ने का डर
इन सभी विपत्तियों से
करे तो क्या करे
बेचारा इंसान न ढंग से
जिए न ढंग से मरे
बेचारा इंसान न ढंग से
जिए न ढंग से मरे.......
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