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कविता : मरने के बाद....

                
                                                         
                            कविता : मरने के बाद....
                                                                 
                            
मेरे जीते जी मेरे पास
कोई भी नहीं आए
जब मैं मर गया तो सारे
के सारे लोग आ गए

उस बख्त काफी इज्जत पा रहा
हल्के में कोई नहीं ले रहे
चार लोग मुझ को फिर
अपने कंधे पर ले रहे

फिर मुझे वे चारों ही
श्मशान घाट ले जा रहे
बाकी फिर काफी संख्या में लोग
मेरे पीछे पीछे आ रहे

कई मेरे बारे में बुरा कहने
वाले भी अच्छा सोच रहे
उन में से कई तो मेरे लिए
अपने आंसू भी पोंछ रहे

फिर मेरी आत्मा अपने
भीतर से जगा
ये जिंदगी से तो मृत्यु मुझे
बहुत अच्छा लगा
ये जिंदगी से तो मृत्यु मुझे
बहुत अच्छा लगा.......

 
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एक घंटा पहले

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