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यह मेरे शहर में कैसी सफाई है

                
                                                         
                            यह मेरे शहर में कैसी सफाई है,
                                                                 
                            
जहां हर तीसरे चौराहे पर आज भी एक अबला देती दुहाई है,
गली गली और मोहल्ला तो है स्वच्छता का हल्ला,
पर आज भी कहीं फटा दुपट्टा है तो कहीं जलता है पल्ला,
स्वच्छता तो अब आदत हुई है और स्वच्छता ही त्यौहार,
पर आज भी नारी के अंतर्मन पर होता हैवानियत का वार,
क्या सही मायने में इंदौर हुआ है नंबर वन,
कह सकता है सर उठा कर खड़ा एक भी जन,
गीला सूखा कचरा तो अलग-अलग कर डाला,
उस जन्मदाता का क्या करें जिसने अपने ही अंश की आबरू को तार-तार कर डाला
कहने को तो हिंदुस्तान का दिल है मेरा मध्य प्रदेश
पर जरा ध्यान से सुनिए महिला उत्पीड़न में भी नंबर वन है मध्य प्रदेश,
सिर्फ जिस्म से ही नहीं उसकी रूह तक से एक पापी खेल जाता है,
क्या हर वह रावण रूपी अपराधी जेल जा पाता है,
हरे और नीले रंग के कूड़ेदान का अंतर तो हर कोई बताएगा,
पर अपने ही रिश्तो में मुखौटों के पीछे का हैवान उसे कौन समझाएगा,
जिस दिन वह अबला का रूप चंडी का हो जाएगा,
उस दिन हर पाखंडी अपने बिल में छुप जाएगा,
जिस दिन उसकी चुप्पी मे सुनामी आ जाएगी,
सही मायने में तब उन नपुंसकों को अपनी नामर्दगी समझ आ जाएगी,
गंभीर चिंतन का विषय देकर जा रही हूं,
कहते हुए अल्पविराम लगा रही हूं
ऐसे ही चलता रहा तो कैसे बनेगा इंदौर नंबर वन..

-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले

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