के एक बार लुटे फिर माया नहीं आती
निकल जाए जवानी काया नहीं आती
फिज़ूल में मुखालिफ़ है एक दूजे के लोग
जाने क्यों मावी अमीरी में दया नहीं आती
गरीबी और गुरबत में हया नहीं आती
-नीटू मावी
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