किसी ने उम्र भर कभी छाव नहीं देखा
दरिया कूद कर पर किया है नाव नहीं देखा
हमने खुली आँखों से दुनिया देखी है मावी
यक़ीन मानो हमने कोई ख्वाब नहीं देखा
बिना रुके चलते रहे मिलों तक पथ पर
रिसते हुए पांवों में कभी घाव नहीं देखा
वक्त ने एक रोज़ घर से ऐसे निकला हमें
फिर कभी लौटकर हमने गाँव नहीं देखा
-नीटू मावी
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