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नीति के दोहे मुक्तक

Neeti ke dohe muktak
                
                                                         
                            
1 - निंदा से घबड़ाय कर ,लक्ष्य छोड़िये नाहि।
राय बदले निंदक की, देखि सफलता पाहि।।

2- अमोघ अस्त्र राजनीति, निंदा को ही जान।
धीरज धरि निंदा सुने, नेता वही महान।।

अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर।
 
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5 वर्ष पहले

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