कब्र तक खोद दोगे किसी की ,पर डेमोक्रेसी नहीं है।
मां,बाप की भी करो ऐसी तैसी पर डेमोक्रेसी नहीं है।
डेमोक्रेसी मे डेमो की क्रेसी का लंबा दौर भी देखा है,
सजा पर रोक है अदालत की ,पर डेमोक्रेसी नहीं है।
खा रहा हूं , पी रहा हूं , और खूब गरिया भी रहा हूं ,
जेल से ज्यादा तो बेल मिली , पर डेमोक्रेसी नहीं है।
ज़मानत से ही तो कायम है कारागृहों की आबरू भी,
सजायाफ्ता अनंत काल से फ्री ,पर डेमोक्रेसी नहीं है।
और कैसी आज़ादी चाहिए उसे खुद ही पता नही है,
उसने जलती संसद ट्विटवा दी,पर डेमोक्रेसी नहीं है।
-जयंत दिक्षित
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X