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इंसाफ़ फ़रार है,अदालतें खुद ज़मानत पर है।

                
                                                         
                            इंसाफ़ फ़रार है,अदालतें खुद ज़मानत पर है।
                                                                 
                            
ग़ज़ब ये कि हमे फख़्र भी इस अमानत पर है।
दानिशमंदो के ईल्म पर क्या सवाल करते हो,
सवाल तुम्हारी स्याह बेपनाह ज़हालत पर है।
दिखाते है वो मिसाल-ए-अमन-ओ-अख़ूवत,
चश्मेदारी हमारी आती हुई नई आफ़त पर है।
हुकूमतों की ही औलादे है ताज़िर-ए-सियासत,
हुकूमत के अहलकारों की नज़र रिश्वत पर है।
जाह-परस्त फ़र्क़ क्या जाने,बग़ावत या ग़द्दारी,
मुल्क मे अर्से से शक आपकी मुहोब्बत पर है।
-जयंत दिक्षित
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45 मिनट पहले

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