आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

एजेंडा बड़ा है।

                
                                                         
                            देश मे होजाये अराजक अवस्था,एजेंडा बड़ा है।
                                                                 
                            
अव्यवस्था की बनी रहे व्यवस्था ,एजेंडा बड़ा है।
'पालतु'तुम्हारे भी थे और 'पालतु' हमारे भी है,
गोया तुम्हारे निशाने पर है संस्था,एजेंडा बड़ा है।
तय करना पड़ेगा, देश के साथ हो या ख़िलाफ़,
तुम्हारे लफ्जों के राज सर-बस्ता,एजेंडा बड़ा है।
'गोएबल्स' सत्य के इश्तहारों मे दिखने लगा है,
बाज़ार मे झूठे सच की नई प्रथा, एजेंडा बड़ा है।
चेहरे पर शिकन है, झुर्रियां भी छिप नही रही,
दहाड़ मे लिपटी है भीतरी व्यथा, एजेंडा बड़ा है।
-जयंत दिक्षित
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
53 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर