जीवन की इस बेला में
जब सांझ ढले
ठहर के देखो अतीत को
फिर भविष्य का निर्माण करो,
इस आत्मचिंतन से
जीवन का यह मर्म समझ में आया
कोई ना अपना ना कोई पराया
घड़ी घड़ी का खेल यह
महादेव ने है रचाया,
ना द्वेष है ना राग है
ना अपना कोई खास है
बस यह एक मायाजाल है
और समय-समय की बात है,
शांति का मार्ग लो
लोभ सारे त्याग दो
छोड़ के इस आडंबर को
महादेव की भक्ति का रसपान लो
बोलो
'सत्यम शिवम सुंदरम'
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