सारी उम्र जलता रहा अंतत मर कर भी जल गया
राख हुआ जल कर शरीर तेरा
गुरुर तेरा सारा खाक हो गया
क्यों जलता रहा सारी उमर
दो घड़ी बैठकर सोचता अगर
छोड़ गया दुनिया क्या मिला पाया भगवान से नजर
तिल तिल के मर गया
दो से बनाऊं चार इसी धुन में उलझा रहा
जीता अगर तू जिंदगी आता तुझे मजा
अपने दिमाग से कभी सोचा नहीं मिली इसकी सजा
जियो अपने लिए दिमाग अपना तुम लगाओ
जल जाओगे मर जाओगे चले जाओगे यह दुनिया छोड़कर सदा
हो जाओगे विदा
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