आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

फलसफा जीवन का

                
                                                         
                            सारी उम्र जलता रहा अंतत मर कर भी जल गया
                                                                 
                            
राख हुआ जल कर शरीर तेरा
गुरुर तेरा सारा खाक हो गया
क्यों जलता रहा सारी उमर
दो घड़ी बैठकर सोचता अगर
छोड़ गया दुनिया क्या मिला पाया भगवान से नजर
तिल तिल के मर गया
दो से बनाऊं चार इसी धुन में उलझा रहा
जीता अगर तू जिंदगी आता तुझे मजा
अपने दिमाग से कभी सोचा नहीं मिली इसकी सजा
जियो अपने लिए दिमाग अपना तुम लगाओ
जल जाओगे मर जाओगे चले जाओगे यह दुनिया छोड़कर सदा
हो जाओगे विदा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर