किसी बाहरवाले के बर्ताव से वाबस्ता नहीं है आपके भीतर का सुकून,
चैनो-अमन और सुकूने-क़ल्ब केलिए चाहिए अपने अंदर शिद्दते जुनून,!
-एन. आर. कस्वाँ
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